Sunday, 14 July 2013

let's know something very imp


एक चेतावनी- समय रहते बचायेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी देख पाएगी विरासत!
राजीव भाई को जानने से पहले हमें उस मानसिकता से बाहर आना होगा जिसमें अंग्रेजों ने हमें फसाया था। अर्थात ये बात अपने दिमाग से निकालनी होगी की जिसके पास डिग्री है वो ही व्यक्ति सही ज्ञान दे सकता है क्यूंकि राजीव भाई ने जो भी विकल्प बताये हैं अपने व्याख्यानों में भारत की भ्रष्ट व्यवस्थाओ को अंजाम देने के लिए वो सब recommended reforms और policies भारत का स्वर्णिम इतिहास और दुनिया भर की आधुनिक और विकसित अर्थव्यवस्थाओ के गहरे अध्ययन के बाद ही बताये हैं। और उनका ये अध्ययन और उनका देश के प्रति भाव किसी डिग्री का मोहताज नहीं और न ही उनके चिंतन में किसी तरह के संदेह की कोई गुंजाइश है। ये बात आपको शायद थोड़ी खटके लेकिन मैं बडी विनम्रता से कहना चाहूँगा की एक बार राजीव भाई के बताये गए रास्ते पे चल के देखिये, आपकी आने वाली पीढ़ी को आप पे नाज़ होगा आपकी समझदारी और हिम्मत के लिए।

जिनके पास डिग्री है और जिनको इस देश की क्रूर व्यवस्थाओं का सच पता है या तो वो अपना मूह नहीं खोलेंगे या तो उनको बेदर्दी से दबा दिया जाएगा। अगर 21वी सदी में कोई था जो निर्भीकता से सच को दृड्ता से लोगों के सामने रख पाया तो वो राजीव भाई ही थे।

राजीव भाई के अध्ययन और त्याग का लाभ हर देशवासी को उठाना चाहिए और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा भारत देना चाहिए जो सोने के चिढ़िया नहीं सोने का शेर हो। जो की निश्चित रूप से संभव है अगर उस पे संकल्प के साथ काम किया जाये तो।

दुनिया में कई नामुमकिन परिवर्तन हमें देखने को मिले। अब एक और ऐतिहासिक परिवर्तन के लिए हम सब भारत वासियों को चेत जाना होगा जल्दी से जल्दी वरना आने वाली पीढ़ी को जवाब देने की स्थिति नहीं होगी हमारी।

आप खुद से पूछो ये सवाल की आज़ादी को पाने की लडाई में तो हम अपने योगदान नहीं दे पाये, लेकिन आज जब मौका है आज़ादी को बचाने की लडाई में अपना योगदान देने का तो क्यूँ पीछे रहें?

अब आप सोचेंगे की आज़ादी को बचाने की लढाई?? जी, हाँ। अगर अभी भी हम सोते रहे तो भारत को RE-colonize करने का जो षड्यंत्र है वो सफल हो जाएगा। फरक इतना होगा की 18वी शताब्दी में मजबूरी में लूटते थे और आज मज़े में लूट जाएंगे अगर ना जागे तो।
और वो षड्यंत्र क्या है उसके लिए आपको सिर्फ और सिर्फ राजीव भाई को सुनना है। इससे सरल योगदान इतनी बडी लडाई के लिए शायद ही कुछ होगा। जो आग राजीव भाई के जाने से बुझ गयी है अब उसको फैलाने का काम हमारे ज़िम्मे है क्यूंकि अब शायद ही राजीव भाई जैसा कोई फिरसे जन्म ले..1995-98 के दौरान देश भर में धूम मचा दी राजीव भाई के व्याख्यानों ने... और अब उस धूम को एक सैलाब के रूप में खड़ा करना है। सोचिए मत... राष्ट्रधर्म से ऊपर कुछ नहीं।


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