Sunday, 14 July 2013


क्या आप सचिन तेंदुलकर को जानते है ?

आप शरद पवार को जानते हैं ?

आप दिग्विजय सिंह को जानते हैं ?

आप अन्ना हजारे को जानते है ?

आप बाबा रामदेव को जानते हैं ?


आपका उत्तर है की हम इनको बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं ..

सचिन तेंदुलकर के विज्ञापनों द्वारा ही हम दिनरात उन उत्पादों बूस्ट , विल्स (सिगरेट ) , आदि का उपयोग कर रहे हैं जिनसे हमारे देश का पैसा विदेशो में जा रहा है और हमारे रूपये का मूल्य दिनों दिन गिरता जा रहा है और डॉलर ऊपर जा रहा है

शरद पवार को आये दिन हम न्यूज़ चेनल पर देख लेते है हर साल ये गेहूं को सडाकर नया रिकार्ड बनाते जा रहे हैं (और शराब भी ) लेकिन गरीबों को नहीं दे सकते है चाहे सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्यों न हो ये किसी की नहीं सुनते है .

दिग्विजय सिह को आये दिन आप ओसामा जी के गुणगान गाते देख सकते हैं .

अन्ना हजारे जी ने इस उम्र में जो क्रांति लाये हैं वो तो काबिले तारीफ़ है आने वाले समय में शायद ही कोई इस प्रकार का कदम उठा सकता है

लेकिन कहा जाता है की इस क्रांति को चिंगारी बाबा रामदेव ने ही दी थी इसमें भी कोई दोहमत नहीं है

अब ये तो हुयी जाने पहचाने चेहरों की बातें जिन्होंने अपनी TRP (Television Rating पॉइंट ) खूब बढ़ायी

लेकिन क्या आप स्व. श्री राजीव दीक्षित जी को जानते हैं ..... आप कहेंगे नाम तो कुछ सुना हुआ लगता है जी बिलकुल सही असल में आज़ादी और भ्रष्टाचार की इस लडाई की शुरुवात श्री राजीव दीक्षित जी ने ही की थी शायद आपको विश्वास नहीं हो रहा है

आज तक किसी भी न्यूज़ चेनल पर कभी आपने राजीव भाई को देखा नहीं क्योंकि इस देश में आजकल इसे महापुरुषों की कद्र नहीं की जाती है

तो चलिए जानते हैं राजीव भाई के बारे में ...................

राजीव दीक्षित (३० नवम्बर १९६७ - ३० नवम्बर २०१०) एक भारतीय वैज्ञानिक,प्रखर वक्ता और आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक थे।
वे भारत के विभिन्न भागों में विगत बीस वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरुद्ध जन जागरण का अभियान चलाते रहे। आर्थिक मामलों पर उनका स्वदेशी विचार सामान्य जन से लेकर बुद्धिजीवियों तक को आज भी प्रभावित करता है।
बाबा रामदेव ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें भारत स्वाभिमान (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा था, जिस पद पर वे अपनी म्रत्यु तक रहे। वे राजीव भाई के नाम से अधिक लोकप्रिय थे।

राजीव दीक्षित जी का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में राधेश्याम दीक्षित एवं मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ। इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा फिरोजाबाद से प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने इलाहाबाद से बी. टेक. तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से एम. टेक. प्राप्त की। राजीव के माता-पिता उन्हें एक वैज्ञानिक बनाना चाहते थे।पिता की इच्छा को पूर्ण करने हेतु कुछ समय भारत के सीएसआईआर तथा फ्रांस के टेलीकम्यूनीकेशन सेण्टर में काम किया। तत्पश्चात् वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ जुड़ गये जो उन्हें एक श्रेष्ठ वैग्यानिक के साँचे में ढालने ही वाले थे

किन्तु राजीव भाई ने जब पं० राम प्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा का अध्ययन किया तो अपना पूरा जीवन ही राष्ट्र-सेवा में अर्पित कर दिया। उनका अधिकांश समय महाराष्ट्र के वर्धा जिले में प्रो० धर्मपाल के कार्य को आगे बढाने में व्यतीत हुआ। राजीव भाई के जीवन में सरलता और विनम्रता कूट-कूट कर भरी थी। वे संयमी, सदाचारी, ब्रह्मचारी तथा बलिदानी थे। उन्होंने निरन्तर साधना की जिन्दगी जी । सन् १९९९ में राजीव जी के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार गाँव गाँव शहर शहर घूमकर भारत के उत्थान के लिए और देश विरोधी ताकतों और भ्रष्टाचारियों को पराजित करने के लिए जन जागृति पैदा कर रहे थे।

राजीव भाई बिस्मिल की आत्मकथा से इतने अधिक प्रभावित थे कि उन्होंने बच्चन सिंह से आग्रह कर-करके फाँसी से पूर्व उपन्यास लिखवा ही लिया। लेखक ने यह उपन्यास राजीव भाई को ही समर्पित किया था। राजीव पिछले 20 वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व उपनिवेशवाद के खिलाफ तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे।

भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत की सम्पूर्ण आजादी के आंदोलन में आहुति देने वाले भारत स्वाभिमान के राष्ट्रीय सचिव, स्वदेशी आंदोलन के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रीय चितंक भाई राजीव दीक्षित जी के निधन के बाद समय मानो रुक सा गया। सम्पू्र्ण राष्ट्र में, विश्व के विभिन्न देशों में शोक की लहर दौड गई। परमात्मा के उस प्रतिभाशाली पुत्र को खोने के बाद मां ही नहीं भारत मां भी आँसू न रोक पाई होगी। लोग कहा करते है कि पूर्व सांसद स्व, प्रकाशवीर शास्त्री के बाद किसी व्यक्तित्व का वक्तव्य सुनकर समय ठहर जाता था तो उस व्यक्ति का नाम था “राजीव भाई”। उन्होंने अपने जीवन, जवानी व अपनी प्रतिभा को मातृभूमि की बलिवेदी पर आहूत कर दिया।

स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता, चिंतक, जुझारू, निर्भीक व सत्य... को दृढ़ता से रखने के लिए पहचाने जाने वाले भाई राजीव दीक्षित जी 30 नवम्बर 2010 को भिलाई (छत्तीसगढ़) में शहीद हो गए | वे भारत स्वाभिमान और आज के स्वदेशी आंदोलन के पहले शहीद है|
लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल को ‘लाल-बाल-पाल’ के नाम से जाना जाता है. ये तीनो स्वदेशी आंदोलन के जन्मदाता थे
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“तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहे न रहे ।”

" श्री राजीव जी को मेरा नमन "
 

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